बिहार में कानून का राज या अपराधियों का तांडव?
भागलपुर (सुल्तानगंज): बिहार एक बार फिर शर्मसार है। सुल्तानगंज में जो हुआ, वह सिर्फ एक हत्या नहीं—यह सीधे-सीधे कानून के राज की हत्या है। दिनदहाड़े, सरकारी दफ्तर के भीतर घुसकर गोलियों की बौछार… और प्रशासन खामोश? यह घटना नहीं, व्यवस्था की नाकामी का खुला ऐलान है।
सरकारी दफ्तर बना ‘शूटिंग रेंज’
मंगलवार की दोपहर सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय अपराधियों के लिए मानों शूटिंग रेंज बन गया। बाइक सवार हमलावर आए और बिना किसी खौफ के ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की हत्या कर दी। सभापति राजकुमार गुड्डू को भी सिर में गोलियां मारकर मौत के मुहाने पर छोड़ दिया गया।सवाल यह है—अगर सरकारी दफ्तर भी सुरक्षित नहीं, तो आम जनता कहां जाए?सत्ता और पुलिस के इकबाल को खुली चुनौतीयह सिर्फ अपराध नहीं, सत्ता को खुली चुनौती है।
आठ से ज्यादा राउंड फायरिंग, पांच गोलियां एक जनप्रतिनिधि को… और हमलावर फरार! क्या यही है वह सुरक्षा, जिसके दम पर जनता से वोट मांगे जाते हैं?घटना के बाद इलाके को सील करना और जांच के आदेश देना महज “बाद की औपचारिकता” है। असली सवाल तो यह है कि रोकथाम कहां थी? खुफिया तंत्र क्या कर रहा था?अब वक्त दिखावे का नहीं, ‘नजीर’ पेश करने का हैसीसीटीवी खंगाले जाएंगे, फाइलें बनेंगी—लेकिन क्या इससे उस परिवार का दर्द कम होगा? अपराधियों को सिर्फ पकड़ना काफी नहीं है, उन्हें ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो नजीर बने। वरना “दिनदहाड़े हत्या” बिहार की पहचान बन जाएगी और हर सरकारी दफ्तर एक संभावित निशाना।अगर अब भी सरकार और प्रशासन नहीं चेते, तो यह एक खतरनाक ट्रेंड बन जाएगा, जहां अपराधी तय करेंगे कि कानून क्या है।बिहार पूछ रहा है—आखिर कब तक?#BiharNews #Bhagalpur #Sultanganj #CrimeUpdate #BiharPolice #LawAndOrder #Justice #Mokama #MokamaInline #NitishKumar #SamratChaudhary #BreakingNews #BiharCrime
