जयंती पर याद किए गए बरबीघा के दधीचि कहे जाने वाले लाल बाबू

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Barbigha:-बरबीघा के दधीचि कहे जाने वाले कृष्ण मोहन प्यारे सिंह उर्फ लाला बाबू की जयंती शनिवार को धूमधाम से बनाई गई. उनके द्वारा स्थापित की गई एसकेआर कॉलेज में जयंती पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया.इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जिले के एसपी डॉक्टर राकेश कुमार जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी नेता शिवकुमार, प्रोफेसर रामविलास सिंह, प्रोफेसर सुधीर मोहन शर्मा, डॉ मुनेश्वर बाबू सहित अन्य लोग शामिल हुए.

कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ राज मनोहर कुमार के द्वारा मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि को पुष्प कुछ और अंगवस्त्र देखकर सम्मानित किया गया.कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज में स्थित लाला बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के उपरांत दीप प्रज्वलित करके किया गया. कार्यक्रम में शामिल अन्य लोगों के द्वारा भी लाला बाबू की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया. कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी शिवकुमार के द्वारा लाला बाबू के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला गया. उन्होंने कहा कि लाला बाबू लोकतंत्र में विश्वास ही नहीं रखते थे, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से जीते भी



थे.कभी भी किसी प्रकार के गलती होने पर अपने से छोटे उम्र के व्यक्ति से भी माफी मांगने में उन्हें कोई शर्म नहीं आती थी. उनकी यही प्रवृत्ति उन्हें लोगों से अलग और महान बनाती थी.वही मुख्यातिथि डॉ राकेश कुमार ने कहा कि मुझे जानकर खुशी हुई कि लाला बाबू के द्वारा यह कॉलेज बनाई गई थी. निश्चित तौर पर जिस समय कॉलेज बना होगा,उस समय लोगों के लिए किसी मंदिर से कम नहीं होगा. लेकिन आज कॉलेज की जर्जर स्थिति देखकर मुझे अंदर सेबहुत तकलीफ हुई है.उन्होंने सभी लोगों के समक्ष एक कमेटी बनाकर कॉलेज की जर्जर स्थिति को बदलने के लिए आर्थिक और शारीरिक रूप से पहल करने का आग्रह भी किया.

उन्होंने इस पहल में हर संभव सहयोग का भी भरोसा दिया.उनके घोषणा पर हॉल में उपस्थित सैकड़ो बच्चों ने ताली बजाकर उनका स्वागत किया. वही लाला बाबू के भतीजे कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ सुधीर मोहन शर्मा ने कहा कि लाला बाबू बरबीघा के दधीचि कहे जाते थे. अंग्रेजों से लड़ने में वह सबसे आगे रहने वाले थे. उन्होंने दर्जनों शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की. समाज सेवा को प्रथम कर्तव्य माना.बरबीघा के तेउस गांव में जन्मे लाला बाबू गांधी जी के आह्वान पर पढ़ाई छोड़ आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे.

बरबीघा के पहले विधायक लाला बाबू चुने गए थे. उन्होंने कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की, जिसमें आरडी कॉलेज शेखपुरा, केकेएस कॉलेज जमुई , केकेएस कॉलेज लखीसराय ,बरबीघा उच्च विद्यालय ,उच्च विद्यालय कटारी, उच्च विद्यालय मालदह, उच्च विद्यालय बबनबिगहा आदि प्रमुख हैं. समाज के लिए दिए गए उनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा. इस मौके पर डॉक्टर उपेंद्र प्रकाश दास, डॉक्टर बीपी मौर्य ,संतोष कुमार ,अरुण कुमार,चंद्रमौली,सत्येंद्र नारायण सिंह आदि शैक्षणिक कर्मी भी उपस्थित है.

कार्यक्रम के अंत में सुमित्रा-सुरमा सदन नामक संस्था के द्वारा विभिन्न संकाय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देकर सम्मानित किया गया. छात्रवृत्ति देने का काम संस्था के संचालक सत्येंद्र सिंह के द्वारा किया गया .कार्यक्रम के संयोजक के रूप में कुंदन लाल ने महती भूमिका निभाई. मंच संचालन का काम कॉलेज के ही प्रोफेसर वीरेंद्र पांडे ने किया. अंत में संतोष कुमार के द्वारा कार्यक्रम में सहभागिता निभाने के लिए लोगों का आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया गया.

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